- हर दिन अलग रूप में दर्शन देंगे भूत भावन भगवान आशुताेष
उज्जैन। बाबा महाकाल के भक्ताें के लिए आज से विशेष आयाेजन शुरू हाे गया है। अवंतिका नगरी में आस्था का वह महाकुंभ शुरू हो चुका है, जिसका इंतजार देश भर के ही नहीं विदेशाें के भक्तों को भी रहता है। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के मंदिर में आज सुबह विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ ‘शिवनवरात्रि’ का मंगलारंभ हुआ। फाल्गुन मास की पंचमी तिथि से शुरू होने वाला यह उत्सव अगले नौ दिनों तक चलेगा, जिसका समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के महापर्व पर होगा। इन नौ दिनों तक बाबा महाकाल एक राजा की तरह नहीं, बल्कि एक दूल्हे की तरह सजेंगे और अपने भक्तों को अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे। आज प्रथम दिन बाबा का विशेष पूजन-अर्चन कर ‘चंदन श्रृंगार’ किया गया, जिसे देखने के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
नैवेद्य कक्ष में विशेष पूजन और कोटि तीर्थ पर अनुष्ठान
उत्सव की शुरुआत आज सुबह कोटेश्वर महादेव के पूजन के साथ हुई। परंपरा के अनुसार, महाकाल मंदिर के पुजारी और पुरोहितों ने कोटि तीर्थ कुंड के समीप स्थित कोटेश्वर महादेव का अभिषेक किया। इसके बाद मुख्य गर्भगृह में भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष पूजा की गई। मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, “शिवनवरात्रि के दौरान बाबा महाकाल को हल्दी चढ़ाई जाती है और प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाता है। यह ठीक वैसी ही रस्म है जैसे किसी विवाह से पूर्व दूल्हे को हल्दी-तेल चढ़ाया जाता है।” नौ दिनों तक चलने वाले इस विशेष अनुष्ठान के लिए गर्भगृह में 11 ब्राह्मणों द्वारा लगातार रुद्राभिषेक और शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ किया जा रहा है।
नौ दिनों तक बदलेंगे बाबा के स्वरूप: भक्त होंगे निहाल
शिवनवरात्रि का सबसे आकर्षण का केंद्र बाबा महाकाल के प्रतिदिन बदलने वाले स्वरूप होते हैं। आज पहले दिन बाबा को घटाटोप स्वरूप में सजाया गया है। आने वाले दिनों में बाबा क्रमशः शेषशायी, छबीना, होलकर, मनमहेश, उमा-महेश, शिव-तांडव और सप्तधान्य स्वरूप में दर्शन देंगे। मंदिर समिति ने जानकारी दी है कि हर शाम को होने वाले इस श्रृंगार के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भक्तों की मान्यता है कि इन नौ स्वरूपों के दर्शन मात्र से ही जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और विवाह संबंधी बाधाएं समाप्त होती हैं।

महाशिवरात्रि पर ‘चंद्रमौलेश्वर’ रूप और रात्रि जागरण
इस उत्सव का चरमोत्कर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन होगा। उस दिन मंदिर के पट 44 घंटों तक लगातार खुले रहेंगे। महाशिवरात्रि की रात को बाबा महाकाल का ‘महापूजन’ होगा और अगले दिन सुबह यानी 16 फरवरी को ‘सवा मन’ का फल और फूलों का सेहरा सजाया जाएगा। इसे ‘साल की सबसे बड़ी भस्म आरती’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह दोपहर में होती है। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार महाशिवरात्रि पर उज्जैन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे, जिसके लिए अभी से होटलों और धर्मशालाओं में बुकिंग फुल हो चुकी है।
सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था: ‘चलत दर्शन’ का नया फॉर्मूला
भीड़ को देखते हुए उज्जैन कलेक्टर और महाकाल मंदिर प्रशासक ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस बार दर्शन के लिए ‘चलत दर्शन’ व्यवस्था लागू की गई है, ताकि कतारें लगातार चलती रहें और किसी को भी 2 घंटे से ज्यादा इंतजार न करना पड़े। पूरे मंदिर परिसर को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है और करीब 2000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चारधाम पार्किंग से लेकर मंदिर तक ई-रिक्शा और शटल बसों का संचालन शुरू कर दिया गया है। साथ ही, पेयजल और धूप से बचने के लिए शेड्स की व्यवस्था भी की गई है।
महाकाल लोक की भव्यता और लाइटिंग का आकर्षण
‘महाकाल लोक’ के निर्माण के बाद यह पहली बड़ी शिवरात्रि है, इसलिए पूरे कॉरिडोर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। रात के समय रंग-बिरंगी लाइटों और लेजर शो के जरिए शिव कथाओं का प्रदर्शन किया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों और फूल विक्रेताओं के अनुसार, इन 10 दिनों में उज्जैन का टर्नओवर करोड़ों में पहुंच जाता है। बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए विशेष गाइड और सूचना केंद्र भी सक्रिय कर दिए गए हैं। महाकाल लोक की दीवारों पर उकेरी गई शिव लीलाएं भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष गाइडलाइन
मंदिर समिति ने अपील की है कि श्रद्धालु भारी बैग या प्रतिबंधित सामग्री लेकर न आएं। गर्भगृह में प्रवेश केवल उन लोगों के लिए होगा जिन्होंने पूर्व में बुकिंग कराई है, सामान्य श्रद्धालुओं को नंदी हॉल या बैरिकेड्स से ही दर्शन करने होंगे। मोबाइल ले जाने पर सख्त पाबंदी रहेगी। उत्सव के दौरान हर शाम मंदिर परिसर में भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होगा, जिसमें देश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।