- महाशिवरात्रि विशेष : रात काे ही कई मंदिराें में लाइन में लगे भक्त, बाबा की झलक के लिए घंटाें किया इंतजार
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सोमवार को मध्यप्रदेश समेत देशभर में शिवभक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली। कई मंदिराें में आधी रात काे ही भक्बक्हत पहुंच गए और जयकारे शुरू हाे गए। मंदिरों में घंटों की गूंज, ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे और भक्ति संगीत से वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालु जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा लेकर शिवालयों की ओर उमड़ पड़े। कई भक्तों ने व्रत रखा, तो कई रात्रि जागरण की तैयारी में जुटे दिखे। मंदिरों के बाहर लंबी कतारें और भीतर मंत्रोच्चार की ध्वनि ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
महाकाल की नगरी में अलौकिक भस्म आरती
उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 4 बजे भस्म आरती के साथ महाशिवरात्रि की शुरुआत हुई। हजारों श्रद्धालु रात से ही कतार में लगे थे। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया। भक्तों का कहना था कि महाशिवरात्रि पर महाकाल के दर्शन का विशेष महत्व है। प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई थी जबकि अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर भक्तों की भीड़
खंडवा जिले में स्थित ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर मंदिर में भी महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। नर्मदा नदी के तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं ने स्नान कर जलाभिषेक किया। मंदिर समिति के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। कई भक्त दूर-दराज के राज्यों से भी पहुंचे। रात्रि में भक्तजनाें ने कीर्तन किए और उत्सव का आनंद लिया।
मंदसाैर के पशुपतिनाथ में लगा भक्ताें का तांता
मंदसाैर की अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा विश्व प्रसिद्ध है। यहां शिवरात्रि पर मनाए जाने वाले उत्सव की बात ही निराली हाेती है। दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए आए। पूरे विश्व में ऐसी प्रतिमा और कहीं नहीं है। इसलिए यहां के उत्सव और आयाेजन भी अनूठा हाेता है। कई भक्त यहां आकर भजन, पूजन और जाप भी करते हैं ताकि बाबा की कृपया उन पर बनी रहे।

भोजपुर में ऐतिहासिक शिवलिंग के दर्शन
भोपाल से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित भोजेश्वर मंदिर में भी भक्तों की भीड़ देखी गई। यहां स्थापित विशाल शिवलिंग को देखने और अभिषेक करने के लिए सुबह से ही लाइन लगी रही। इतिहास और आस्था का संगम कहे जाने वाले इस मंदिर में युवाओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। कई परिवार बच्चों के साथ दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रबंधन ने प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की।
जबलपुर और पचमढ़ी में भी शिवभक्ति
जबलपुर स्थित पचमठा मंदिर और पचमढ़ी के प्राचीन जटाशंकर मंदिर में भी महाशिवरात्रि का विशेष उत्साह देखा गया। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित इन मंदिरों में प्राकृतिक सौंदर्य के बीच भक्तों ने पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि महाशिवरात्रि पर यहां का वातावरण विशेष रूप से दिव्य महसूस होता है। इन विशेष मंदिराें के अलावा भी शहरी क्षेत्र के कई मंदिराें में भाेजन, भजन और भंडारे का आयाेजन किया गया।
राजधानी भोपाल में रुद्राभिषेक और भंडारे
भोपाल के प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और भजन संध्या का आयोजन हुआ। कई स्थानों पर भंडारे लगाए गए, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में और युवा हाथों में पूजा की थाली लिए नजर आए। मंदिरों में अनुशासन बनाए रखने के लिए पुलिस, प्रशासनन के साथ मंदिर समिति के सदस्य और भक्त जन सक्रिय रहे।
क्यों खास है महाशिवरात्रि?
पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए कई स्थानों पर शिव विवाह की झांकियां निकाली जाती हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन चार प्रहर की पूजा और रात्रि जागरण करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं और पूरी रात ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथाें में शिवरात्रि की कथा शिव विवाह से हटकर दूसरे प्रसंगाें से भी जुड़ी है।
इस तरह महाशिवरात्रि पर मध्यप्रदेश शिवमय हो उठा। आस्था, उत्साह और भक्ति का यह संगम एक बार फिर यह साबित करता है कि भगवान शिव के प्रति लोगों की श्रद्धा समय के साथ और भी गहरी होती जा रही है।
