- महाविनाशकारी शीत लहर का कहर जारी, कई इलाकाें में जन जीवन अस्त-व्यस्त
वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: साल 2026 की शुरुआत अमेरिका के लिए एक प्राकृतिक आपदा बनकर आई है। ‘विंटर स्टॉर्म फर्न’ (Winter Storm Fern) ने अमेरिका के एक बड़े हिस्से को अपने आगोश में ले लिया है। न्यू मेक्सिको के रेगिस्तानों से लेकर न्यूयॉर्क की गगनचुंबी इमारतों तक, कुदरत का ऐसा रौद्र रूप दशकों बाद देखा गया है।
तूफान का सफर: कहाँ से शुरू हुआ और कहाँ थमा?
इस तूफान की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को अमेरिका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से (Four Corners Region) से हुई। सबसे पहले कोलोराडो और न्यू मेक्सिको में भारी बर्फबारी हुई। इसके बाद यह तूफान तेजी से दक्षिण के राज्यों जैसे टेक्सास, ओक्लाहोमा और अर्कांसस की ओर बढ़ा। आमतौर पर गर्म रहने वाले इन राज्यों में भारी पाला और ‘आइस स्टॉर्म’ देखा गया। 25-26 जनवरी तक यह तूफान उत्तर-पूर्वी राज्यों (New England) में पहुँच गया, जहाँ न्यूयॉर्क, फिलाडेल्फिया और मेन (Maine) जैसे शहरों में करीब 2 फीट तक बर्फ गिरी। 127 साल का इतिहास बदला और इस तूफान ने मौसम विभाग के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
मिसौरी (Kansas City): 1956 के बाद पहली बार यहाँ एक ही दिन में 5.2 इंच बर्फबारी दर्ज की गई।
पेंसिल्वेनिया: स्वीडन टाउनशिप जैसे इलाकों में 24.9 इंच बर्फ गिरी, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
विमानन क्षेत्र (Airline Industry) में हाहाकार
इस तूफान का सबसे बुरा असर हवाई यात्रा पर पड़ा है। जानकारों के मुताबिक, यह 2020 की महामारी के बाद विमानन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा संकट है:
रविवार (25 जनवरी) को एक ही दिन में 10,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। डलास (DFW) और शिकागो जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर लाखों यात्री फंस गए। रनवे पर जमी बर्फ और ‘डि-आइसिंग’ (बर्फ हटाने) की प्रक्रिया धीमी होने के कारण उड़ानों का संचालन असंभव हो गया।
बुनियादी ढांचे और जनजीवन को बड़ा नुकसान
एयरलाइंस कंपनियों को करोड़ों डॉलर का घाटा उठाना पड़ रहा है। भारी बर्फ और जमी हुई बारिश (Freezing Rain) के कारण बिजली के तार टूट गए, जिससे 10 लाख से ज्यादा घर अंधेरे में डूब गए। लुइसियाना और टेनेसी में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। अब तक सड़क हादसों और अत्यधिक ठंड के कारण कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अंतरराज्यीय राजमार्गों (Interstates) पर सैकड़ों गाड़ियाँ फंस गईं और फिसलन के कारण हजारों एक्सीडेंट हुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब ‘आर्कटिक हवाएं’ अमेरिका के उन हिस्सों तक पहुँच रही हैं जहाँ पहले कभी इतनी ठंड नहीं पड़ती थी।
नीना जैन – लाइफ कोच दूरदर्शन एंकर
