डेली कॉलेज प्रबंधन के रवैये पर उठे सवाल, अभिभावकों ने मांगी स्पष्टता

इंदौर: स्कूल सुरक्षा, गरिमा और विश्वास के पवित्र स्थान होते हैं। फिर भी, डेली कॉलेज, इंदौर में हाल की घटनाओं ने मैनेजमेंट की विफलता को उजागर किया है। स्कूल के प्रबंधन और फैकल्टी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एक होनहार छात्रा, निया बाहेती द्वारा लगातार परेशान किए जाने की बार- बार की गई शिकायतों को नज़रअंदाज़ किया, जिसके कारण आखिरकार उसे हेड गर्ल के साथ साथ अपने शैक्षणिक वर्ष के बीच में ही संस्थान छोड़ना पड़ा।

निया का स्कूल में लगातार शानदार रिकॉर्ड रहा ऑल राउंडर ट्रॉफी, बेस्ट ओवर ऑल स्टूडेंट, और जुलाई 2025 में छात्रों के वोट से हेड गर्ल चुनी गई। थोड़े ही दिन बाद उसे अपनी क्लास के कुछ क्लास मेट्स और फैकल्टी के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा और शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय, प्रिंसिपल ने “दुर्व्यवहार को नज़रअंदाज़ करने” और “मुस्कुराकर भूल जाने” की सलाह दी, यानि उसकी परेशानी को कम आंका गया और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।

मामला तब और बिगड़ गया जब फैकल्टी सदस्य अदिति घटक ने कथित तौर पर स्कूल के कार्यक्रमों में मिस मैनेजमेंट के बारे में चिंता जताने के बाद निया को ताने मारे और परेशान किया। एक स्टूडेंट लीडर को सपोर्ट करने के बजाय, योजनाबद्ध तरीके से उसे और अलग थलग कर दिया। किसी मेडिकल जांच, असेसमेंट या फैक्ट चेक किए बिना स्कूल की कम्यूनिटी में बातें फैलाई जाने लगीं कि निया “मानसिक रूप से अस्थिर” है। एक युवा लापरवाह तरीके से लेबल करने से उन मूल शिकायतों से ध्यान हट गया जिन पर कभी संबोधित नहीं किया गया।

विरोधाभास स्पष्ट हैः जुलाई में स्कूल को लीड करने के लिए उपयुक्त मानी गई एक स्टूडेंट को, कुछ ही हफ्तों में, उन्हीं टीचर्स और प्रिंसिपल द्वारा बदनाम किया गया और कमजोर करने की कोशिश की, जिन पर स्कूल के हरेक बच्चे की भलाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। स्कूल, प्रिंसिपल और टीचर्स को भेजे गए औपचारिक नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला है, जो जानबूझकर चुप्पी और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

निया के पिता अपूर्व बाहेती ने कहा: “डेली कॉलेज ने जो किया है वह विश्वासघात से कम नहीं है। मेरी बेटी को योग्यता के आधार पर हेड गर्ल चुना गया था, फिर भी जब उसने वास्तविक चिताएं जताई, तो प्रबंधन ने उन पर ध्यान देने के बजाय उसे बदनाम किया चुना। बिना किसी मेडिकल आधार के किसी बच्चे को लापरवाही से ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ कहना न केवल मानहानिकारक है, बल्कि बेहद गैर-जिम्मेदाराना भी है। यह नेतृत्व नहीं है यह प्रतिष्ठा के पीछे छिपी कायरता है।”

बाहेती कानूनी और रेगुलेटरी उपायों पर विचार कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक बच्चे तक सीमित नहीं है। यह इस बारे में ज़रूरी सवाल उठाता है कि स्कूल शिकायतों को कैसे संभालते हैं, छात्रों की गरिमा की रक्षा कैसे करते हैं, और अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी कैसे निभाते हैं।

शैक्षणिक संस्थान माता-पिता की जगह लेते हैं। डेली कॉलेज का व्यवहार इस ज़िम्मेदारी के प्रति चौंकाने वाली लापरवाही दिखाता है। बच्चों की रेपुटेशन को बचाया जाना जरूरी है जो कि कभी भी बच्चे की भलाई की कीमत पर नहीं हो सकता। अब चुप रहने का समय खत्म हो गया है। जवाबदेही, पारदर्शिता और सुधार पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

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