– मल-मूत्र के पानी से 16 मौतों के बाद भी पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था नहीं
भागीरथपुरा दूषित जल कांड में नया मोड़ आ गया है। लगातार मौतों के बाद मरीजों की संख्या कम होने के लिए तैयार नहीं है। हादसे के करीब सात दिन बाद बस्ती में 65 ऐसे नए मरीज मिले हैं जो उल्टी दस्त का शिकार हैं। इनमें से 15 की हालत ठीक नहीं है और ऐहतियातन इन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि शेष को इलाज कर घर पहुंचा दिया गया है। एनएचएम की टीम ने कॉलोनी की विभिन्ना गलियों का दौरा किया और जांच की तो कई लोगों में गंभीर बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं।
लगभग 150 अब भी अस्पताल में
गौरतलब है कि मल-मूत्र वाला गंदा पानी पीने के कारण भागीरथ पुरा बस्ती में 1500 से ज्यादा लोगों के संक्रमित होने की बात कही जा रही है। लगभग 150 अब भी अस्पताल में भर्ती है इनमें से 20 आईसीयू में बताए जा रहे हैं। टायलेट का पानी पेयजल में मिले होने के कारण लगातार मरीज सामने आ रहे हैं। इन्हीं कारणों से 16 की मौत हो चुकी है। हालांकि सरकारी आंकड़ा आधा ही बताया जा रहा है।
काई लगे टैंकर से पानी भेजा, इतने दिन बाद भी पीने का साफ पानी नहीं दे सके
हैरत की बात है कि हादसे के इतने दिन बाद जब निगम के तमाम आला अधिकारी और प्रदेश स्तर के कई बड़े नेता भागीरथपुरा में डेरा डाले हुए हैं वहां पीने का स्वच्छ पानी तक मुहैया नहीं कराया जा सका है। आज भी वहां नलों में मल मूत्र का संक्रमित पानी आ रहा है। शनिवार को एक घटनाक्रम यह भी हुआ कि पीने का पानी लेकर एक टैंकर वहां पहुंचा। जिसमें रहवासियों ने काई जमी हुई देखी। यह देखकर रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और वे तिलमिला गए। व्यवस्था को कोसते हुए उन्होंने कहा कि इतनी जान चली गई फिर भी ना नगर निगम सुधरने को तैयार है और न ही कोई जन प्रतिनिधि सुध ले रहे हैं।
सरकारी लापरवाही, लोग मल मूत्र मिला पानी पीने को मजबूर
निगमायुक्त दिलीप यादव को हटाए जाने और अन्य अधिकारियों की रवानगी के बाद दर्जन भर से ज्यादा कर्मचारी, अधिकारी और अपर आयुक्त की ड्यूटी भागीरथ पुरा के लीकेज ढूंढने और नई लाइन डालें के लिए लगाई गई है, लेकिन उन्हें भी पर्याप्त सफलता नहीं मिल पा रही है। शनिवार को लाइन में तीन जगह ऐसे लिकेज मिले हैं, जिनसे सीवरेज का पानी पीने के पानी की लाइन में रिस्क रहा है और गंदगी बढ़ रही है। सरकारी लापरवाही के चलते यहां के लोग मल मूत्र मिला पानी पीने को मजबूर हैं और उसकी सजा उन्हें मौत के रूप में मिल रही है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि पीने के पानी की व्यवस्था इस कॉलोनी में कब तक होगी, इसका जवाब देने को कोई भी तैयार नहीं है ? हर रोजनए दावे किए जाते हैं, नए कयास लगाए जाते हैं और जिन घरों में मौत हुई है वहां जाकर राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही है।

मातम के बीच राजनीतिक दंगल
भागीरथपुरा में फैले मातम के बीच भाजपा-कांग्रेस का आपसी दंगल शुरू हो गया। शनिवार को कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता भागीरथ पुरा के मृतकों के घर जा रहे थे। कांग्रेस का कहना है कि वे सांत्वना देने, संवेदना जताने और एक सर्वे करने पहुंचे थे कि कितने घरों में कितने लोग बीमार हुए और भारतीय जनता पार्टी द्वाराक्यों सच्चाई छुपी जा रही है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी द्वारा विरोध कर उन्हें रोक दिया गया। बात इतनी बढ़ी कि दोनों पार्टी के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। खूब धक्का-मुक्की हुई, गाली गलौज मची, चप्पलें भी चलीं और आखिरकार पुलिस ने पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई नेताओं को पकड़ कर जेल भेज दिया। आने वाले समय में इसी तरह राजनीतिक बहस और झगड़े चलते रहेंगे या पीड़ितों को राहत मिलेगी और रहवासियों को साफ पानी मिलेगा, यह सवाल अब भी अधर में झूल रहा है।