जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देगा यूजीसी का नियम

यूजीसी के एन्टी डिस्क्रिमिनेशन बिल पर बोले मांदलिया

यूजीसी द्वारा एन्टी डिस्क्रिमिनेशन नियम 2026 जो कि लागू किया गया है पूरी तरह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं समान्य वर्ग के स्टूडेंट्स के बीच भेदभाव पनपाने का काम करेगा और लागू नियमो का वर्ग विशेष द्वारा दुरुपयोग न हो इसकी जवाबदेही तय नही की गई सीधे तौर पर सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को आरोपी बना दिया जाएगा, कॉलेज लेवल पर भी जो समिति बनेगी उसमे सामान्य वर्ग के किसी भी व्यक्ति के न होने से सीधे तौर पर जांच में भी निष्पक्षता नही रहेगी।

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत मालवा प्रान्त के प्रचार प्रमुख एवं प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर पदस्थ डॉ.दिलीप कुमार मांदलिया ने यूजीसी द्वारा लागू इस बिल को गैर संवेधानिक बताया है साथ ही कहा है कि यूजीसी को सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए लागू नियम के अनुसार जो विश्वविद्यालय या कॉलेज लेवल पर समिति बनाई जाए उसमे सामान्य वर्ग के व्यक्ति को भी रखा जाए जिससे कि सामान्य वर्ग के स्टूडेंट को किसी दुर्भावना वश फसाया न जा सके

केवल समिति में SC/ST/OBC के लोगो को रखने से जांच सही दिशा में नही हो सकती है, इसलिए यूजीसी को एन्टी डिस्क्रिमिनेशन बिल 2026 को तत्काल प्रभाव से संशोधन करना चाहिए।

(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

 

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