कक्षा से आगे साक्षरता: जागरूक किसान ही सशक्त किसान

पालघर: साक्षरता का मतलब सिर्फ पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जानकारी को समझना और सही समय पर सही फैसला लेना भी उतना ही जरूरी है। जब लोगों को अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और अपने आसपास हो रहे बदलावों की सही जानकारी होती है, तो वे समाज में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपनी भूमिका निभा पाते हैं।

एक किसान, जो अपनी जमीन के रिकॉर्ड को समझता है, मुआवजे के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी रखता है, अपने अधिकारों को जानता है और अफवाहों तथा तथ्यों में फर्क कर सकता है, वह अपनी जमीन से जुड़े फैसले ज्यादा समझदारी से ले सकता है।

विश्व साक्षरता दिवस परखावड़ा 4C पावर ट्रांसमिशन लिमिटेडइसी सोच को आगे बढ़ा रही है—जागरूक किसान ही सशक्त किसान है।

खावड़ा 4C के लिए किसानों के साथ जुड़ाव सिर्फ परियोजना को पूरा करने तक सीमित नहीं है। कंपनी लगातार किसानों कोभूमि मुआवजा प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, स्वामित्व रिकॉर्ड, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास रहने या खेती करने से जुड़ी आम भ्रांतियोंके बारे में जानकारी देने का काम कर रही है।

किसानों के लिए सही समय पर सही जानकारी मिलना बेहद अहम है। इससे मुआवजा प्रक्रिया को समझना आसान होता है और कई तरह की अनिश्चितताएं दूर होती हैं। कौन से दस्तावेज देने हैं, जमीन के स्वामित्व की जांच क्यों जरूरी है और आगे क्या प्रक्रिया होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी किसानों को पूरे मामले में ज्यादा भरोसे और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करती है।

जानकारी से सशक्तिकरण की ओर इसका एक अच्छा उदाहरणभिवंडी तालुका में पोट हिस्सा सर्वेक्षणहै, जिसमें खावड़ा 4C ने मदद की। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य अलग-अलग भू-स्वामियों के हिस्से को स्पष्ट करना है।

यह खास तौर पर उन मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां परिवारों ने आपस में जमीन बांट ली है, लेकिन 7/12 उतारे में जमीन अब भी संयुक्त स्वामित्व के रूप में दर्ज है। ऐसी स्थिति मुआवजा मिलने के दौरान भ्रम और विवाद पैदा कर सकती है।

खावड़ा 4C नेतालुका इंस्पेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (TILR) और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), भिवंडीके साथ मिलकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इसके तहत 16 में से 15 गांवों में चिन्हित 115 में से 105 सर्वे नंबरों का सिर्फ तीन दिनों में मानचित्रणकिया गया।

इससे राइट ऑफ वे (RoW) कॉरिडोर के एक बड़े हिस्से में काम आगे बढ़ाने में मदद मिली और सत्यापित स्वामित्व रिकॉर्ड के आधार पर मुआवजा प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाया जा सका।

किसानों को जागरूक करने की जरूरत सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। खावड़ा 4C का सामुदायिक संवाद ट्रांसमिशन टावरों की जरूरत और उनकी भूमिका समझाने, उनसे जुड़ी आम भ्रांतियों को दूर करने और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की वास्तविक स्थिति से किसानों को परिचित कराने पर भी केंद्रित है।

“साक्षरता सिर्फ पढ़ने और लिखने तक सीमित नहीं है। इसका मतलब अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और उन प्रक्रियाओं को समझना भी है, जो सीधे हमारी आजीविका से जुड़ी हैं। खावड़ा 4C में हमारा मानना है कि जागरूक किसान ही सशक्त किसान है। जब हम समुदायों को दस्तावेजों, मुआवजा प्रक्रिया और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की वास्तविकताओं के बारे में समझाते हैं, तो वे ज्यादा आत्मविश्वास और स्पष्टता के साथ अपने फैसले ले पाते हैं।” – निनाद पितले, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं ग्रुप हेड, कॉर्पोरेट अफेयर्स, खावड़ा 4C पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड

ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर बिजली को उत्पादन केंद्रों से घरों, कारोबार और उद्योगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन कॉरिडोर के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों बनाया जा रहा है और इसकी क्या भूमिका है। सही जानकारी कई तरह की आशंकाओं को दूर कर तथ्यों और जागरूक भागीदारी की राह खोल सकती है।

खावड़ा 4C के लिए समुदायों के बीच जागरूकता पैदा करना कोई एक बार की गतिविधि नहीं है। यह लोगों को लगातार जानकारी देने, उनकी शंकाओं को समझने, चीजों को सरल तरीके से समझाने और उनसे संवाद बनाए रखने की प्रक्रिया है।

जब किसान जागरूक होते हैं, तो इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास सिर्फ टावरों और ट्रांसमिशन लाइनों तक सीमित नहीं रहता। यहलोगों की भागीदारी, पारदर्शिता और सशक्त समुदायों के निर्माणकी कहानी बन जाता है।

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