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वैश्विक स्तर पर शोध इस बात को साबित करते हैं कि ओमकार यानी ओम (ॐ) सिर्फ एक धार्मिक या आध्यात्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक ऐसा महत्वपूर्ण कारक है जिसके उच्चारण से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा और सकारात्मक असर होता है। ॐ का चिकित्सकीय प्रभाव वैज्ञानिक महत्व वे भी नहीं जानते, जो इसका नियमित जाप करते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ खास तथ्य :
मस्तिष्क पर प्रभाव और मानसिक शांति –
लिम्बिक सिस्टम को शांत करना : एमआरआई (fMRI) अध्ययनों के अनुसार ओम (ॐ) का जप करने से मस्तिष्क के लिम्बिक क्षेत्र (limbic system) में गतिविधियां कम होती हैं, जिसमें एमीग्डाला (amygdala) और हिप्पोकैंपस (hippocampus) शामिल हैं। ये क्षेत्र तनाव, भय और भावनाओं को नियंत्रित करते हैं। जब ये क्षेत्र शांत होते हैं, तो व्यक्ति का तनाव कम होता है और मानसिक शांति महसूस होती है।
शांति और रचनात्मकता में रूचि : शोध बताते हैं कि ओम के जप से मस्तिष्क में अल्फा (Alpha) और थीटा (Theta) तरंगों का उत्पादन बढता है। अल्फा तरंगें विश्राम और शांत अवस्था और थीटा तरंगें रचनात्मकता और गहरे ध्यान से जुड़ी होती हैं।
एकाग्रता और स्मृति : कई स्टडी यह भी बताती हैं कि नियमित रूप से ओम का जप करने से छात्रों और पेशेवरों की एकाग्रता, ध्यान और स्मृति में सुधार होता है।
शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव:
वेगस तंत्रिका (Vagus Nerve) को उत्तेजित करना: ओम के उच्चारण से उत्पन्ना होने वाला कंपन्ना वेगस तंत्रिका को उत्तेजित करती है। जिससे शरीर के आराम और पाचन (rest and digest) प्रतिक्रिया नियंत्रित होती है। वेगस तंत्रिका के उत्तेजन से तनाव भी कम होता है और शारीरिक क्रियाएं भी शांत होती हैं।
रक्तचाप और हृदय गति में कमी : मेडिकली यह साबित हो चुका है कि ओम का जप करने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप (blood pressure) में उल्लेखनीय कमी आती है। इसके अलावा, हृदय गति (heart rate) भी धीमी होती है।
फेफड़ों की क्षमता में सुधार : ओम का सही उच्चारण करने के लिए गहरी और नियंत्रित सांस लेने की आवश्यकता होती है। इससे फेफडों की क्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। कुछ मामलों में यह श्वसन संबंधी रोगों वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।
एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव: ओम का जप, शरीर में एंडोर्फिन “अच्छा महसूस कराने वाले” (feel-good) हार्मोन के स्राव को बढ़ावा देता है जिससे दर्द, तनाव को कम करने और खुशी की भावना को बढ़ाने में मदद मिलती है।
ध्वनि और कंपन का महत्व:
दुनिया के कुछ वैज्ञानिकों ने ओम की ध्वनि को लगभग 432 हर्ट्ज (Hz) की आवृत्ति पर कंपन्न करते हुए पाया है, जिसे “ब्रह्मांड की आवृत्ति” (cosmic frequency) भी कहा जाता है। यह कंपन्ना शरीर के हर हिस्से में फैलती है, जिससे ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को संतुलित करने में मदद मिलती है। ओम का जाप करने से शरीर के इन हिस्सों में होता है कंपन्ना –
– नाभि और पेट के निचले हिस्से में कंपन।
– सीने और गले में कंपन।
– सिर और साइनस क्षेत्र में कंपन, जो शांति और विश्राम लाता है।
कई शोध में हुई ओम के वैज्ञानिक महत्व की पुष्टि
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि केवल पांच मिनट के लिए नियमित रूप से ओम का जप करने से चिंता का स्तर काफी कम हो सकता है। एक अन्य शोध में उच्च रक्तचाप (hypertension) वाले लोगों पर ओम जप के प्रभावों का अध्ययन किया गया और पाया गया कि कुछ ही मिनटों के जप करने से उनके रक्तचाप में कमी आ गई।
ओम का जप करना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा या आध्यात्मिक क्रिया ही नहीं है बल्कि एक शक्तिशाली वैज्ञानिक तकनीक और सफल चिकित्सकीय पद्धति है, जो मानव शरीर और मन पर सकारात्मक असर डालकर ऊर्जा प्रदान करती है। इसका जप और अभ्यास करने से तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और समग्र शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में बड़ी सहायता मिलती है जो व्यावसायिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन को सफल और खुशहाल बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।