आपके एक फोन से बुजुर्गों के घर पहुंचेगा भोजन, गोल्ड कॉइन सेवा ट्रस्ट ने शुरू की निशुल्क टिफिन सेवा

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– 14 जनवरी से सीनियर सिटीजन के लिए अनूठी सेवा ‘भोजन प्रसादम्” शुरू
इंदौर। प्रदेश और देश भर में दर्जनों वृद्धाश्रम चल रहे हैं। यहां रहने, खाने के पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन अपने घर पर अकेले रहने वाले असहाय और जरुरतमंद बुजुर्गों तक भोजन पहुंचाने की अब तक कोई व्यवस्था नहीं थी। इस कमी को दूर करते हुए शहर के गोल्ड कॉइन सेवा ट्रस्ट ने अनोखा अभियान चलाया है। इसमें 60 वर्ष से अधिक उम्र के सीनियर सिटीजन के लिए निशुल्क टिफिन सेवा ‘भोजन प्रसादम्” के तहत् उनके घर तक भोजन पहुंचाया जाएगा। बस आपको अपना फोन उठाना है और ऐसे जरुरतमंद बुजुर्गों की जानकारी ट्रस्ट के नंबर 72411 92411 पर देना है।

घर पहुंचकर आधार नंबर लेंगे, फिर शुरू होगा टिफिन
ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक कई बुजुर्ग अपने परिवार से अलग अकेले रहते हैं। कुछ की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती तो कुछ शारीरिक रूप से खाना बनाने में असमर्थ होते हैं। यही नहीं कई बुजुर्ग बीमार, असहाय अथवा जरुरतमंद भी होते हैं। यह सेवा इसी तरह के बुजुर्गों के लिए है। इस तरह के बुजुर्गों की जानकारी ट्रस्ट के नंबर पर भेजी जा सकती है। ट्रस्ट के प्रतिनिधि उक्त स्थान पर पहुंचकर संबंधित बुजुर्ग से मिलेंगे और आधार कार्ड, फोन नंबर और पूरी जानकारी लेने के बाद टिफिन सेवा शुरू कर दी जाएगी। इस सेवा में असहाय विकलांग लोगों को भी टिफिन सुविधा दी जाएगी। फिलहाल इंदौर में यह सेवा एक दिन में एक बार टिफिन देने की सुविधा के साथ शुरू की जा रही है। आने वाले समय में अन्य शहरों में भी इस तरह की सुविधा शुरू की जा सकती है।

धन नहीं, श्रम-सहयोग की जरूरत
पदाधिकारियों और सदस्यों का कहना है कि नाम या धनोपार्जन के लिए नहीं बल्कि सेवा कार्यों के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इसलिए वे अपनी पहचान भी सार्वजनिक अथवा प्रकाशित करना सेवा कार्यों के विरूद्ध समझते हैं। ट्रस्ट की आर्थिक जरुरतों को पूरा करने के लिए जनसहयोग लेने की बजाय आपस में ही इस जिम्मेदारी को बांट लिया जाता है। बुजुर्गों के लिए शुरू की गई सेवा में भी बड़ा खर्च होगा, लेकिन इसकी व्यवस्था वे अपने स्तर पर कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें दान देने वालों की ज्यादा जरुरत नहीं है, लेकिन शहर में टिफिन सप्लाय के लिए कई लोग लगेंगे। कार्यकर्ताओं का एक बड़ा नेटवर्क बनाना होगा, ताकि बुजर्गों की जानकारी हम तक पहुंचे और समय पर उन्हें टिफिन भेजा जा सके। इसलिए जो लोग हमसे जुड़ना चाहें, संपर्क कर सकते हैं।

मस्ती-मजाक से शुरू अब सेवा कार्य ही उद्देश्य
गौरतलब है कि गोल्ड कॉइन सेवा ट्रस्ट करीब 60 लोगों के एक समूह द्वारा चलाया जा रहा है। ये सभी स्कूल, कॉलेज और सामाजिक कार्यक्रमों में दोस्त बने और अब मिलकर ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं। ट्रस्ट बनाने की योजना करीब सात साल पहले एक वाट्सएप ग्रुप बनाने के साथ की गई थी। मस्ती-मजाक और मनोरंजन के साथ हुई शुरुआत में 26 जनवरी और 15 अगस्त पर राजवाड़ा पर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह वितरित किए गए थे। समय के साथ योजना बदली और अब सेवा कार्य करना ही ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य है। ट्रस्ट द्वारा जरुरतमंद लोगों के लिए कई तरह की योजना चलाई जा रही है।

निराश्रितों के लिए रहने की सुविधा भी
ट्रस्ट द्वारा निराश्रित बुजुर्गों के लिए रहने की सुविधा भी दी जा रही है। करीब तीन साल पहले वृद्धाश्रम शुरू किया था। सर्वसुविधायुक्त इस वृद्धाश्रम को ‘ दशरथ सेवाश्रम” नाम दिया गया है। आज यहां 35 निराश्रित बुजुर्ग रह रहे हैं और यहां की भी सभी सुविधाएं निशुल्क हैं।

मरीजों के लिए वरदान बना मेडिकल उपकरण बैंक
वृद्धाश्रम शुरू करने के बाद ट्रस्ट ने जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं को समझा और मदद देना शुरू की। मरीजों की आर्थिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने मेडिकल उपकरण बैंक शुरू किया। कई मरीजों को अस्पताल में इलाज करवाने के बाद महीनों घर पर आराम करना होता है या घर पर भी इलाज करवाना होता है। इसके लिए उन्हें कई उपकरणों की जरुरत होती है जो काफी महंगे होते हैं। इनकी समस्याओं का निराकरण करने के लिए निशुल्क मेडिकल उपकरण बैंक शुरू किया गया। इसमें पलंग, व्हील चेयर, ऑक्सीजन सिलेंडर, वॉकर, ग्लूकोमीटर, ऑक्सीमीटर सहित 1500 उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। मरीजों को उपकरण देते समय राशि डिपॉजिट करवाई जाती है और जब उपकरण लौटाया जाता है तो राशि लौटा दी जाती है। इंदौर में आज इस बैंक की तीन शाखाएं हो चुकी हैं। इंदौर के अलावा उज्जैन, राजगढ़, धार, रतलाम, नीमच और नागदा में भी इसी तरह की सेवा दी जा रही है।

लॉकडाउन में वितरित किए 5 लाख 65 हजार पैकेट
ट्रस्ट द्वारा निराश्रितों, असहाय लोगों को भोजन करवाने का काम लॉकडाउन के समय से ही किया जा रहा है। पहले दिन 100 पैकेट बनाकर वितरित किए गए थे। बाद में 15 हजार पैकेट प्रतिदिन वितरित किए गए और शहर ही नहीं बाहरी लोगों को भी राहत दी गई। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी हमारे प्रयास इसी तरह जारी रहेंगे। ताकि अलग-अलग स्तरों पर अलग-अलग कार्यों से मानव सेवा की जा सके।

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